भारत में बुर्का बैन किए जाने की मांग शिवसेना ने उठाई है, जिसका उसकी सहयोगी बीजेपी ने भी समर्थन नहीं किया है। बीजेपी सांसद व पार्टी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा राव ने शिवसेना की इस मांग से असहमति जताते हुए कहा कि भारत में बुर्का पर प्रतिबंध लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने भी ऐसी मांग को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ करार देते हुए इस बारे में फैसला महिलाओं पर छोड़ देने की बात कही।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में श्रीलंका में ईस्टर के मौके पर हुए बम हमलों के बाद चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगाए जाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार के अयोध्या जिले के दौरे का जिक्र करते हुए लिखा, ‘रावण की लंका में जो हुआ वो राम की अयोध्या में कब होगा?’ शिवसेना से इसे ‘सर्जिकल स्ट्राइक जितना हिम्मत का कार्य’ बताते हुए पीएम मोदी से राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लेने की अपील की।
Asaduddin Owaisi, AIMIM on Shiv Sena's proposal to ban burqa: Shiv Sena is ignorant, SC judgement on privacy clearly lays down that choice is now a fundamental right. It's a violation of the MCC, I request EC to take immediate note of it, it's an attempt to create polarization. pic.twitter.com/i8DNFaZ2zK
— ANI (@ANI) May 1, 2019
पार्टी ने अपने मुखपत्रों ‘सामना’ और ‘दोपहर का सामना’ के संपादकीय में कहा, “इस प्रतिबंध की अनुशंसा आपातकालीन उपाय के तौर पर की गई है जिससे कि सुरक्षा बलों को किसी को पहचानने में परेशानी ना हो। नकाब या बुर्का पहने हुए लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं।”
Union Minister, Ramdas Athawale on Shiv Sena's proposal to ban burqa in public places: Not all women who wear burqa are terrorists, if they are terrorists their burqa should be removed. It's a tradition & they have the right to wear it, there shouldn't be a ban on burqa in India. pic.twitter.com/DcIaL7IFLP
— ANI (@ANI) May 1, 2019
‘डेली मिरर’ समाचार पत्र ने सूत्रों के हवाले से मंगलवार को कहा था कि श्रीलंकाई सरकार मौलानाओं से विचार-विमर्श कर इसे लागू करने की योजना बना रही है और इस मामले पर कई मंत्रियों ने मैत्रिपाला सिरिसेना से बात की है।
दैनिक समाचार पत्र के अनुसार, “सरकार ने कहा है कि, श्रीलंका में 1990 के शुरुआती दशक तक खाड़ी युद्ध से पहले मुस्लिम महिलाओं में नकाब या बुर्का का कोई चलन नहीं था। खाड़ी युद्ध में चरमपंथी तत्वों ने मुस्लिम महिलाओं के लिए यह परिधान बताया।”
रिपोर्ट्स में कहा गया था कि कोलंबो के निकट डेमाटागोडा में कई महिला आत्मघाती हमलावर भी बुर्का पहन कर भाग गई थीं। वहां तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी।
शिवेसना की इस अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के नेता रामदास अठावले ने इससे असहमति जताई और कहा, ‘बुर्का पहनने वाली सभी महिलाएं आतंकी नहीं होतीं, यदि वे आतंकी हों तो उनके बुर्के हटा दिए जाने चाहिए। लेकिन यह परंपरा है और उन्हें इसे पहनने का अधिकार है, भारत में बुर्का पर बैन नहीं लगाया जाना चाहिए।’
















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