मुंबई: वर्ष 2011 में सात जुलाई को हुए मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट केस में 12 आरोपी दोषी करार दिए गए हैं। मुंबई की लोकल ट्रेन में हुए सीरियल बम धमाकों के नौ साल बाद इस मामले में फैसला सुनाया गया । इस मामले में 13 आरोपी हैं जिसमें 12 को मकोका कोर्ट ने दोषी करार दिया। दोषियों के सजा ऐलान सोमवार को होगा।

गौर हो कि नौ साल पहले 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेन में सिलसिलेवार धमाके हुए थे, जिसमें 187 लोगों की मौत हुई थी और 800 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। यह धमाके प्रेशर कुकर बम से कराए गए थे। पहला धमाका दोपहर 4.35 के आसपास हुआ था, थोड़ी ही देर में माटुंगा, बांद्रा, खार, जोगेश्वरी, बोरीवली तथा भायंदर के पास उपनगरीय ट्रेनों में धमाके हुए। इन धमाकों में 188 लोगों की मौत हुई थी और 824 घायल हुए थे।
मुंबई लोकल में तब माटुंगा से मीरा रोड के बीच एक के बाद एक हुए 7 धमाकों में 189 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 824 लोग घायल हो गए थे. अब 9 साल बाद पीड़ित परिवारों को इंसाफ मिला है. कोर्ट ने इस मामले में कमाल अंसारी, फैजल शेख, एतिशाम सिद्दीकी, नवेद हुसैन, आसिफ खान और बशीर खान को दोषी करार दिया है.
कोर्ट ने इन सभी आरोपियों पर आतंकी हमले की साजिश रचने और राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे आरोप तय किए थे. फैसले के वक्त सभी आरोपी कोर्ट में मौजूद थे. एटीएस ने इन सभी को 2006 में 20 जुलाई से 3 अक्टूबर के बीच गिरफ्तार किया था. चार्जशीट 30 आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई थी. इनमें 13 पाकिस्तानी थे और 17 भारतीय. इन 17 भारतीयों में से 4 अब भी फरार हैं
पुलिस के मुताबिक मार्च 2006 में लश्कर-ए-तैयबा के आज़म चीमा ने अपने बहावलपुर स्थित घर में सिमी और लश्कर के दो गुटों के मुखियाओं के साथ इन धमाकों की साजिश रची थी। पुलिस के मुताबिक मई 2006 में बहावलपुर के ट्रेनिंग कैंप में 50 युवकों को भेजा गया। उन्हें बम बनाने और बंदूकें चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही कड़ी पूछताछ के दौरान अपनाए जाने वाले हथकंडों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया।














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