लखनऊ: देवरिया शेल्टर होम में बच्चियों और किशोरियों को अवैध रूप से रखे जोन एवं उनका शारीरिक और मानसिक शोषण का मामला सामने आने के बाद योगी सरकार की खासा किरकिरी हुई। इस मामले में अब योगी सरकार एक्शन मोड में आ गई है।

यही कारण रहा कि बुधवार को शासन ने एडीजी गोरखपुर जोन की इस मामले में जांच आख्या पर कठोर निर्णय ले लिया। इसके चलते पांच आईपीएस अफसरों के तबादले भी कर दिए गए।
आशुतोष कुमार को डीआईजी एसीओ लखनऊ से डीआईजी रेंज बस्ती बनाया गया है। राकेश शंकर को डीआईजी रेंज बस्ती से डीजीपी आफिस, एन कोलांची को एसपी महोबा से एसपी देवरिया, रोहन पी कनय को एसपी देवरिया से डीजीपी आफिस और कुंवर अनुपम सिंह को एसपी एटीएस लखनऊ से एसपी महोबा बनाया गया है।
एडीजी गोरखपुर जोन की जांच आख्या के बाद एसपी देवरिया के पद पर रहे रोहन पी कनय को डीजीपी आफिस से संबद्ध कर दिया गया है।
24 सितंबर 2017 से 24 मार्च 2018 तक तत्कालीन एसपी देवरिया रहे राकेश शंकर जो वर्तमान में डीआईजी रेंज बस्ती के पद पर तैनात हैं, को डीजीपी आफिस संबद्ध करते हुए उकने विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रस्तावित कर दी गई है।
दयाराम सिंह गौर, क्षेत्राधिकारी सदर देवरिया द्वारा बरती गई लापरवाही एवं अकर्मण्यता के कारण उन्हें तत्काल प्रभावे से स्थानांतरित करते हुए विभागीय कार्यवाही संस्थित की गई है।
दिनांक 31 जुलाई 2018 को कोतवाली देवरिया में जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा पंजीकृत कराए गए मुकदमे में समय रहते कार्यवाही न किये जाने के कारण संबंधित विवेचक और थाना प्रभारी द्वारा बरती गई लापरवाही एवं शिथिलता के कारण उन्हें सस्पेंड करते हुए विभागीय कार्यवाही के निर्देश डीजीपी द्वारा दे दिए गए हैं।
डीजीपी ओ पी सिंह से अपेक्षा की गई है कि डीएम देवरिया के आदेश के बावजूद जिन थाना स्तरों से मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के संरक्षण गृह में अवैध रूप से बरामदशुदा महिलाओं या बालिकाओं को भेजा गया है, उन थाना प्रभारियों का भी दायित्व निर्धारित कर विभागीय कार्यवाही संस्थित करते हुए शासन को एक पक्ष में अवगत कराएं।



















