नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स जैसे संस्थान भी डेंगू का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं। यहां उत्तरप्रदेश मूल के 12 वर्षीय बंटू की मौत हो गई। खास बात यह है कि बंटू हड्डी के कैंसर से लड़ रहा था, लेकिन डेंगू के डंक से हार गया।
हड्डी के कैंसर ऑस्टेओसर्कोमा को लेकर पांच माह एम्स में उसका इलाज चला था। एक बार कीमोथैरेपी और दो अन्य जटील ऑपरेशन हो चुके थे।
बंटू का ऑपरेशन करने वाले आर्थोपेडिक्स के प्रोफेसर डॉ. शाह आलम खान के मुताबिक, बंटू कैंसर से जूझ रहा था। यह बहुत दुखद है कि वह इतनी बड़ी बीमारी से साहस के साथ लड़ रहा था, लेकिन डेंगू से मौत हो गई।
डॉ. शाह के मुताबिक, उसका एक पैर कैंसर की चपेट में आ गया था। वह डॉक्टरों से कहता था कि मेरा पैर जल्दी ठीक कर दो। मुझे क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है। पैर ठीक नहीं हुआ तो लोग मुझे लंगड़ा कहेंगे।
बंटू पूरी तरह से स्वस्थ था, तभी उसे घुटनों में भयंकर दर्द शुरू हुआ। एम्स लाया गया तो कैंसर का पता चला। पहली बार के ऑपरेशन में डॉक्टर पैर बचाने में कामयाब रहे थे, लेकिन दूसरे ऑपरेशन के दौरान घावों में संक्रमण हो गया। इसके चलते पैर काटना पड़ा, लेकिन डॉ. शाह ने उससे वादा किया था कि वे बहुत बढ़िया कृत्रिम पैर लगाकर देंगे।
गरीब और भूमिहीन पिता इलाज का खर्च वहन नहीं कर पा रहे थे, तो डॉक्टरों ने एक गैर सरकारी संगठन से संपर्क साधा और कृत्रिम पैर का बंदोबस्त किया। बंटू के पैर का माप भी ले लिया गया था, लेकिन पैर बनकर आता, इससे पहले ही वह अस्पताल छोड़कर यूपी चला गया।
गैर सरकारी संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ ही डॉक्टरों ने भी संपर्क की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अब बंटू एम्स के इमरजेंसी वार्ड में मृत मिला।
साभार नई दुनिया


















