हसन मिर्ज़ा साहब का जारी करदा 21वीं रमज़ान का जुलूस अपने पुराने वक़्त पर निकाला ही जाएगा। अभी कुछ देर पहले हसन मिर्ज़ा कमेटी की मीटिंग में तै पाया गया।
खानदाने हसन मिर्ज़ा की जानिब से कल से ये एलान सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा था और आज इसकी खबर तमाम अख़बारों में छपी | एलान ये था “तमाम शियाने अली को ये इत्तिला दी जाती हैं। की हज़रत अमीरूल मोमेनींन की शहादत को 1400 बरस मुकम्मल हुए हैं। ओर इस साल हज़रत अली अ०स० के ताबूत के वक़्त में थोड़ी तब्दीली की गई हैं ताबूत की मजलिस 2:45 पर शुरू हो जायँ गीI…15 मिनट की मजलिस के बद ठीक 3 बजे तबूते अमीरूल मोमेनींन शबिहे नजफ़ से कजमैन विक्टोरिया स्ट्रीट खाला बाज़ार होता हुआ करबला तालकटोरा जाएगा।
जंगल में आग की तरह ये खबर फैलते ही शियोँ में इज़्तेराब ओ बेचैनी देखने को मिली- मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी ने जैसे ही ये बयान पढ़ा उन्होंने इस बयान की सख्त अल्फ़ाज़ में मज़म्मत की – क़ौम का दर्द मौलाना नारी में वालिदे मोहतरम कल्बे सादिक़ साहेब की देंन है |
मामले को गंभीरता से लेते हुवे मौलाना कल्बे जावद नक़वी ने और मौलाना यासूब अब्बास ने बयान जारी किया | मौलाना कल्बे जावद के मुताबिक़ 21 रमजान के जुलूस के वक़्त की तब्दीली की मिख़ालिफत की है | मौलाना आग़ा रूही ने 21 रमजान के जुलूस का वक़्त बदलने की सख्त अल्फ़ाज़ में मज़म्मत की |
खानदाने हसन मिर्ज़ा मरहूम की कमिटी ने हज़रत अमीरूल मोमेनींन की शहादत को 1400 बरस मुकम्मल होने के सबब अगर ये फैसला लेना था शिया क़ौम के बुज़ुर्ग उलेमा से पूछना चाहिए था |





















