लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में सात राज्यों की 51 सीटों पर छह मई (सोमवार) को मतदान होना है सारी तैयारियां पूरी कर ली गई । अब फैसला इस चरण में चिलचिलाती धूप में भी सियासी पारा खूब चढ़ा लेकिन कांग्रेस और भाजपा के कई दिग्गजों की अग्निपरीक्षा मतदान के दिन होगी ।

लोक सभा इलेक्शन 2019 – लखनऊ की सियासत में एक नया मोड़ उस वक्त आता है जब मौलाना कल्बे जव्वाद नक़वी बीजेपी के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह की जीत के लिए दुआ करते है और उनको सपोर्ट करते नजर आए – ग़ौरतलब बात ये है कि इस बार मौलाना का ये दुआइया प्रोग्राम किसी मस्जिद इमाम बाड़े में नही बल्कि होटल क्लार्क अवध में मूनअक़ीद हुवा। जंगल में आग की तरह खबर फैली तो कहीं आक़ा की नुमाइंदगी करते लोगों को देखा गया वही काफी लोगों को उनकी और बीजेपी की कुर्बत को लेकर ग़म ओ गुस्सा औऱ नाराजगी देखने को मिली ।
उनकी यह नाराजगी मौलाना कल्बे जवाद के लिए नहीं थी बल्कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए हद से सिवा थी – सियासी पार्टियों पर हमला करते हुए योगी बार-बार शियों के पहले इमाम हजरत अली अलैहिस्सलाम के नाम का इस्तेमाल करते हैं और बीजेपी में मौजूद कोई भी मुसलमान मंत्री उनसे ऐसा करने के लिए मना नहीं करता है और बल्कि बीजेपी के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह जी ने योगी के बयान कि आज तक ना निंदा की और ना ही आश्वासन दिया कि हम माफी मंगवाएंगे | हमने कल मौलाना से सुना की राजनाथ सिंह अच्छे इंसान है तो वह मौला अली अस की शान में गुस्ताखी वाले बयान पर माफ़ी कैसे नहीं मंगवा सके | और वोट की अपील करने मुस्लिम धर्म गुरुओं के पास बारी-बारी पहुंचते रहे | बल्कि राजनाथ सिंह योगी से माफ़ी मांगने का कहते तो वह शायद मान भी लेते क्योँकि आपके बक़ौल वह अच्छे इंसान है – एलेक्शन से पहले अली और बजरंगबली या अनारकली किसी को कुछ भी कहना है कहे लेकिन हमारे रसूल अल्लाह स0 अ0 के भाई और शियोँ के पहले इमाम हज़रत अली अस की शान में गुस्ताखी करना छोड़ दो । मौलाना कल्बे जव्वाद के विरोध में सोशल मीडिया नहीं वरन हर तरफ उनके इस क़दम की आलोचना हो रही है क्योँकि मोदी राज में नफरत मआब लीचिंग, नोटेबंदी- गोश्तबंदी न जाने क्या किया ज़ुल्म ओ सितम सबको बर्दाश्त करना पद रहा – नोट बंदी की वजह से आज भी ग़रीब निर्धन के घर उसकी गाढ़ी मेहनत की कमाई जो किसी वजह से कैश नहीं हो पाई मोदी के ताना शाही बयान की वजह से कागज़ का टुकड़ा हो गई |
सियासी धर्म गुरुओं का मानना है कि इस बार किसी कि हवा नहीं है जनता के बीच क्योँकि विकास के नाम पे जगह जगह सपा के अखिलेश यादव को वोट मांगते तो देखा गया लेकिन और किसी ने विकास के नाम पर वोट नहीं माँगा | सो जनता समझदार है अपने हक़ का इस्तेमाल करना जानती है उसे पता है मेरा नेता कैसा हो | है मौलाना के बयान के सबब जो चाँद लोग बीजेपी को वोट दे भी देते तो वह इस वजह से नहीं देने कि बात क़बूल कर रहे है उनको राजनाथ सिंह से कहना चाहिए था कि वह अली बजरंगबली बयान पे माफ़ी मांगे उनकी वजह से शिया धर्म आहत हुआ और हम शिया धर्म के लोग लखनऊ में धर्म कि राजनीती नहीं होने देंगे इस लिए लखनऊ से बीजेपी की हार यक़ीनी है | सर्वे रिपोर्ट की अगर माने तो किसी भी स्टेट से किसी भी राज्य से बीजेपी नहीं जीत रही है क्योंकि जनता मोदी और योगी कार्यकाल में नोट बंदी, जीएसटी, माव लीचिंग, आसिफा केस, अखलाक केस, पुलवामा अटैक, नजीब (गुमशुदा ), बेरोज़गारी , महंगाई, ददन और टाटा स्काई पर अत्यधिक खर्चे काफी सारे हादसों को सामने रखकर मतदान बूथ पर जाएगी और अपने हक़ का इस्तेमाल करेगी | जनता को जुमलेबाज नहीं चाहिए | केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार ग़रीबों का ही खून चौसा गया है और अमीरों का क़र्ज़ा माफ़ किया गया है |
चौंकाने वाली बात यह होगी कि इस बार लोक सभा इलेक्शन 2019 का नतीजा इंसान की सोच के एकदम खिलाफ होगा |
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लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में सात राज्यों की 51 सीटों पर 6 मई को होने वाले मतदान के लिए चुनाव प्रचार शनिवार शाम पांच बजे समाप्त हो गया। इस चरण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी, अर्जुनराम मेघवाल, राज्यवर्धन सिंह राठौड़ समेत कई दिग्गज नेता अपनी चुनावी किस्मत आजामाएंगे।
इस चरण में 674 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसके साथ ही लोकसभा की 425 सीटों के लिए चुनाव पूरा हो जाएगा और शेष दो चरणों में 118 सीटों के लिए मतदान बाकी रह जाएगा। इस तरह 17वें लोकसभा चुनाव का तीन चौथाई से अधिक सफर पूरा हो जाएगा। चिलचिलाती गर्मी के बावजूद चुनाव प्रचार में उम्मीदवारों और उनके समर्थकों का जोश बना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने चुनावी रैलियां की।
भाजपा के सामने 39 सीटों को बचाने की चुनौती
पांचवें चरण में भाजपा के समक्ष 39 सीटों को अपने खाते में बचाए रखने की चुनौती है। इनमें से अधिकतर सीट हिंदी पट्टी क्षेत्रों में हैं। 2014 के चुनाव में इनमें से यूपी की 12, राजस्थान की सभी 12, मप्र की सभी 7, झारखंड की सभी 4, बिहार की 3 और जम्मू-कश्मीर की 01 सीट भाजपा ने हासिल की थी।
अहम है उत्तर प्रदेश
पांचवां चरण बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस चरण में यूपी की सबसे ज्यादा 14 सीटों पर चुनाव हो रहा है। 2014 के चुनाव में कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली को छोड़कर भाजपा ने 14 में से 12 सीटें जीती थीं।



















