भारत सरकार का कहना है कि एनआरसी सूची से बाहर रह गए लोगों को फिलहाल न तो डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और न ही विदेशी माना जाएगा. जानिए उनके लिए कैसी है आगे की राह.

दोरजी वेल्ले वेबसाइट के अनुसार असम के नगांव जिले के सुरेंद्र सरकार की आंखों में भविष्य को लेकर चिंता साफ देखी जा सकती है. सुरेंद्र राज्य के उन 19 लाख से ज्यादा लोगों में शामिल हैं जिनके नाम बीते सप्ताह प्रकाशित एनआरसी की अंतिम सूची में शामिल नहीं है. वह कहते हैं, “मेरा और मेरे तीन बेटों के नाम नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस (एनआरसी) में शामिल नहीं हो सके हैं. हालांकि हमने तमाम जरूरी दस्तावेज जमा किए थे. अब हमारा भविष्य अधर में लटक गया है. हम समझ नहीं पा रहे हैं कि सरकार हमें जेल में भेजेगी या फिर यहां से खदेड़ देगी.”
माना जा रहा है कि यह सूची देश की सबसे बड़ा मानवीय त्रासदी पैदा कर सकती है. हालांकि सरकार ने भरोसा दिया है कि ऐसे लोगों को फिलहाल न तो डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और न ही विदेशी माना जाएगा. लेकिन एनआरसी में शामिल होने की लड़ाई हार जाने के बाद ऐसे लोगों के समक्ष अब विदेशी न्यायधिकरणों में जाकर खुद को भारतीय साबित करने की बेहद जटिल चुनौती है.
इतनी बड़ी तादाद में लोगों के एनआरसी से बाहर रहने की वजह से ही सत्तारुढ़ बीजेपी से लेकर कांग्रेस और दूसरे तमाम गैर-सरकारी व मानवाधिकार संगठन एनआरसी में विसंगितयों के आरोप लगा रहे हैं. इसके खिलाफ कुछ संगठन सुप्रीम कोर्ट जाने की भी तैयारी कर रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच यह 19 लाख लोग बेहद तनाव व असमंजस में हैं. उनको यह नहीं सूझ रहा है कि अब आगे अपनी नागरिकता कैसे साबित करें.
एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर हुए 19 लाख लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी नागरिकता का फैसला अब कब कैसे होगा? केंद्रीय गृह मंत्रालय और असम सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि एनआरसी की सूची से बाहर हुए लोगों को हिरासत में नहीं लिया जाएगा. ऐसे लोग पहले विदेशी न्यायधिकरण में अपील कर सकते हैं और वहां अनुकूल फैसला नहीं होने की स्थिति में वे लोग हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की शरण में भी जा सकते हैं.
असम के नगांव में एनआरसी में नाम शामिल करवाने के लिए देखी गईं थीं लंबी लंबी कतारें.असम सरकार ने एनआरसी से बाहर रहे लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देने का एलान किया है. इन मामलों में आम लोगों की सहायता करने के लिए 200 वकीलों का एक समूह बनाया गया है. गौहाटी हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील बिजन महाजन कहते हैं, नागरिकता कानून 2003 के नियम संख्या आठ के तहत एनआरसी से बाहर रहे लोगों को फिलहाल विदेशी नहीं माना जाएगा. लेकिन इस भरोसे के बावजूद सरकार से लोगों को भरोसा उठता जा रहा है. धुबड़ी के मोहम्मद शकील कहते हैं, “हमारे पास जितने दस्तावेज थे वह तो पहले ही जमा कर दिए थे. लेकिन उससे नागरिकता साबित नहीं हुई. अब न्यायधिकरणों के सामने पेश करने के लिए नए दस्तावेज कहां से ले आएं?”



















