मैं क़सम खाता हूं कि शराब (Liquor) पीने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का ध्यान रखूंगा. शराबियों ने जब इस तरह की कसमें खायीं तो सरकार ने शराब, सिगरेट-तंबाकू (Tobacco Products) बेचने की इजाजत दे दी. फिर नतीजा ये हुआ कि एक शराबी नशे के आलम में सोशल डिस्टेंसिंग तोड़ते हुए पकड़ा गया.
मजिस्ट्रेट ने शराबी से कहा कि तुमने तो कसम खायी थी कि पीने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग नहीं तोड़ेगे. शराबी ने मजिस्ट्रेट को जवाब दिया – साहब जब मैं होश मे था तब ये कसम खायी थी, और अब नशे में मैंने सोशल डिसटेंसिंग का उल्लंघन किया है. मजिस्ट्रेट साहब नशे में और होश में बड़ा अंतर है. जितना अंतर सिगरेट-तंबाकू और शराब का टैक्स (tax) मिलने और ना मिलने वाली सरकारों में होता है.
कुछ इस तरह के चुटकुले सोशल मीडिया में वायरल होने लगे हैं.
अली हसनैन आब्दी फ़ैज़
लॉकडाउन में शराब, गुटखा- तंबाकू और सिगरेट पर पूर्णतया पाबंदी से महिलायें बेहद खुश थीं. अब दुखी हैं.खासकर पत्नियों में ज्यादा बेचैनी है. उन्हें डर है कि अब घर में बैठकर उनके पति शराब पियेंगे. कोरोना काल में काल बनने के खतरे वाली सिगरटों के धुएं से घर में घुटन पैदा होगी. दीवारों पर पान-गुटखे के दाग लगेंगे. घर में शराब का नशा आतंक भी पैदा कर सकता हैं. परंतु सरकार सो रही राजस्व से ज्यादा कुछ नहीं दिखाई उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के थाना हसनगंज क्षेत्र में एक मित्र ने शराब के नशे में अपने मित्र को गोली मार दी दोनों फार्मेसी का शटर गिरा कर दारु पी रहे थे वहीं दूसरी ओर बदायूं उत्तर प्रदेश में एक नशेड़ी ने अपनी पत्नी का पेट हंसी आ से फाड़कर यह देखने का प्रयास किया कि उसके पेट में बेटा है कि बेटी नशा लोगों का जीवन नर्क में बना रहा है परंतु सरकार राजस्व की लालच में नशा बंदी लागू करने में संकोच कर रही है।
तालाबंदी में भी सरकार को शराबयों के दर्द का अहसास था नशेड़ीओं के लिए सरकार चिंतित थी।
सरकार को शराबियों के दर्द का पूरा अहसास है. गुटखा-तम्बाकू, सिगरेट, खैनी इत्यादि मयस्सर करने वाली दुकानें खुलने की इजाजत मिलने के बाद शराबियों और ध्रूमपान करने वालों में खुशी की लहर है
एक गंभीर बात ये है कि जब हम कोविड 19 से लड़ रहे हैं और हर चिकित्सक का ये मत है कि कोरोना वायरस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों पर पहला हमला करता है. जबकि गुटखा तंबाकू, सिगरेट और शराब जैसे नशे प्रतिरोधक क्षमता कमजोर करते हैं. इसके अलावा दूसरे हानिकारक पहलू ये हैं कि नशे में नशेड़ियों द्वारा लॉकडाउन और सोशल डिस्टेडिंग के उल्लंघन की घटनायें मुश्किल़े पैदा करेंगी. पान और गुटखा का थूक संक्रमण फैलाये. और सिगरेट को तो चिकित्सक कोरोना वायरस को दावत देना जैसा बता रहे हैं.
इन तमाम पहलुओं के बाद भी सरकार ने शराब, गुटखा-तंबाकू और.सिगरेट की बिक्री को बहाल कर दिया.
एक गंभीर बात ये है कि जब हम कोविड 19 से लड़ रहे हैं और हर चिकित्सक का ये मत है कि कोरोना वायरस कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों पर पहला हमला करता है. जबकि गुटखा तंबाकू, सिगरेट और शराब जैसे नशे प्रतिरोधक क्षमता कमजोर करते हैं. इसके अलावा दूसरे हानिकारक पहलू ये हैं कि नशे में नशेड़ियों द्वारा लॉकडाउन और सोशल डिस्टेडिंग के उल्लंघन की घटनायें मुश्किल़े पैदा करेंगी. पान और गुटखा का थूक संक्रमण फैलाये. और सिगरेट को तो चिकित्सक कोरोना वायरस को दावत देना जैसा बता रहे हैं.
इन तमाम पहलुओं के बाद भी सरकार ने शराब, गुटखा-तंबाकू और.सिगरेट की बिक्री को बहाल कर दिया.
नशा मुक्ति के प्रति केंद्र और प्रदेश सरकार उदासीन हैं। महिलाओं की शिक्षा, सम्मान, सुरक्षा और नशा मुक्ति के बिना देश का विकास संभव नहीं है।

















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