लखनऊ में रमज़ान के चाँद के साथ ही शहर की फ़िज़ा बदल जाती है। सुबह सहरी की ख़ामोशी और शाम इफ्तार की गहमागहमी—दोनों मिलकर अवध की तहज़ीब को नई रौशनी दे देते हैं। पुराने लखनऊ से लेकर नए इलाक़ों... Read more
लखनऊ में रमज़ान के चाँद के साथ ही शहर की फ़िज़ा बदल जाती है। सुबह सहरी की ख़ामोशी और शाम इफ्तार की गहमागहमी—दोनों मिलकर अवध की तहज़ीब को नई रौशनी दे देते हैं। पुराने लखनऊ से लेकर नए इलाक़ों... Read more
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