मुंबई के पुराने भवनों की विदाई? Redevelopment की फेहरिस्त में शहर की विरासत
मुंबई सिर्फ गगनचुंबी इमारतों का शहर नहीं है। इसकी पहचान उन पुराने भवनों, चालों, गलियों और इमारती बस्तियों से भी बनी है, जिन्होंने दशकों तक शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक जिंदगी को अपने भीतर समेटे रखा। लेकिन अब इन पुराने भवनों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा है—मरम्मत, पुनर्निर्माण या Redevelopment?
MHADA के मुताबिक मुंबई की Island City में करीब 13,091 पुराने और जर्जर cessed buildings हैं। ये भवन मुख्यतः 1940 से पहले से लेकर 1969 तक के दौर में बने हुए हैं। इनमें से कई भवनों की संरचनात्मक स्थिति चिंताजनक है।
51 फीसदी सहमति का प्रावधान
Redevelopment को तेज करने के लिए MHADA Act की Section 79A महत्वपूर्ण हो गई है। इसके तहत पहले landlord को redevelopment proposal देने का अवसर मिलता है और उसके साथ 51 प्रतिशत tenants/occupants की सहमति आवश्यक है।
अगर landlord निर्धारित अवधि में प्रस्ताव नहीं देता, तो tenants की cooperative housing society को प्रस्ताव आगे बढ़ाने का अवसर दिया जाता है। और यदि दोनों स्तरों पर redevelopment आगे नहीं बढ़ता, तो MHADA का Mumbai Building Repairs and Reconstruction Board भवन और जमीन अधिग्रहित करके redevelopment कर सकता है।
Redevelopment सिर्फ South Mumbai तक सीमित नहीं
MHADA के ताज़ा रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि redevelopment approvals और commencement certificates मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में जारी हो रहे हैं।
सितंबर 2026 के हालिया रिकॉर्ड में उदाहरण के तौर पर:
विखरोली ईस्ट — Kannamwar Nagar की इमारतों के redevelopment के approvals
घाटकोपर ईस्ट — Pant Nagar की इमारतों के redevelopment
कांदिवली वेस्ट/Charkop — कई housing societies के redevelopment certificates
बोरीवली वेस्ट — Gorai और Old MHB Colony की इमारतें
चेंबूर — Subhash Nagar की इमारत का redevelopment पूरा होने की दिशा में
अंधेरी वेस्ट — D.N. Nagar और Azad Nagar की कई redevelopment परियोजनाएं
गोरेगांव, विले पार्ले, जुहू और वर्सोवा — अलग-अलग redevelopment proposals/permissions भी रिकॉर्ड में हैं।
यानी redevelopment अब मुंबई के कई हिस्सों में दिखाई दे रहा है।
लेकिन असली कहानी South Mumbai की है
Cessed buildings के मामले में DCPR 2034 का Regulation 33(7) खास महत्व रखता है। इसका उद्देश्य पुराने cessed buildings के redevelopment को प्रोत्साहित करना है और इसके लिए अतिरिक्त FSI का प्रावधान है।
MHADA के अनुसार redevelopment में tenants के rehabilitation को भी व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
MHADA
यहीं से मुंबई की कहानी का दूसरा पहलू सामने आता है।
नई इमारत मिलेगी—लेकिन पुरानी मुंबई का क्या होगा?
मदनपुरा, नागपाड़ा, भायखला, डोंगरी, गिरगांव, कालबादेवी और आसपास के इलाकों में पुराने भवन केवल रहने की जगह नहीं हैं। इनसे मोहल्लों की सामाजिक संरचना, पुराने कारोबार, धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियां और मुंबई की वास्तु पहचान जुड़ी हुई है।
सरकार के एक हालिया नीति दस्तावेज़ में भी cessed buildings के redevelopment की समस्याओं में tenant consent, छोटे plots, कम road width और कई जगह redevelopment की आर्थिक feasibility जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। उसी दस्तावेज़ में cluster redevelopment और Kamathipura जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर redevelopment की संभावनाओं का भी उल्लेख है।
Maharashtra Government
Heritage का सवाल भी महत्वपूर्ण
Redevelopment और heritage conservation के बीच संतुलन भी बड़ा मुद्दा है। Heritage buildings के लिए अलग नियम लागू होते हैं और कुछ श्रेणी के heritage buildings पर redevelopment के दौरान विशेष प्रावधान लागू होते हैं।
Bombay High Court
इसलिए सवाल केवल यह नहीं है कि “पुरानी इमारत कब टूटेगी?”
सवाल यह भी है—
क्या नई इमारत पुराने मोहल्ले की पहचान को बचा पाएगी?
पुराने किरायेदारों को क्या मिलेगा?
छोटे दुकानदारों का क्या होगा?
और जिन गलियों में मुंबई की कई पीढ़ियां पली-बढ़ीं, उनका चरित्र कितना बदलेगा?
शहरनामा का बड़ा सवाल
Redevelopment मुंबई की जरूरत है—खासकर उन इमारतों के लिए जो सचमुच जर्जर और असुरक्षित हैं। लेकिन redevelopment के साथ यह भी तय करना होगा कि मुंबई की पुरानी सामाजिक और वास्तु विरासत का कितना हिस्सा बचाया जा सकता है।
क्योंकि शहर सिर्फ उसकी नई इमारतों से नहीं बनता—
शहर उसकी यादों, गलियों और उन पुरानी दीवारों से भी बनता है जिनके बीच कई पीढ़ियों ने जिंदगी गुजारी है।
नोट: 13,091 का आंकड़ा सभी redevelopment projects की कुल संख्या नहीं है; यह MHADA द्वारा बताए गए पुराने cessed buildings का आंकड़ा है। अलग-अलग MHADA records में redevelopment की मंजूरियां इससे अलग और व्यापक श्रेणी में आती हैं।


















